गर्मी का कहर, CSR का सहारा: कंपनियों को सड़क पर जूझते राहगीरों और गरीबों के लिए 5 प्रोजेक्ट सुझाव

गर्मी का कहर, CSR का सहारा: कंपनियों को सड़क पर जूझते राहगीरों और गरीबों के लिए 5 प्रोजेक्ट सुझाव

Patna: भारत की तपती गर्मी सिर्फ मौसम का नाम नहीं, लाखों गरीबों, सड़क पर रहने वालों, वंचितों और यात्रियों की जिंदगी पर गंभीर स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक प्रभाव डालती है। 45°C से ऊपर तापमान, निर्जलीकरण, धूप में काम करने वाले मजदूर, बिना छत के जीवन — इन सबका सामना रोजाना किया जाता है। गर्मी सिर्फ मौसम नहीं, एक मानव संकट है। इस संकट में कंपनियां अपने CSR (Corporate Social Responsibility) फंड का इस्तेमाल कर हजारों गरीबीों और राहगिरों को बड़ी राहत दे सकती है। Sumitra Jan Kalyan Sewa Sansthan कंपनियों और डोनर से अपील करता है कि हमारे प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग करें और गरीबों की दुआ लें।

Sumitra Jan Kalyan की ओर से गर्मी में राहत के लिए 5 प्रोजेक्ट्स शुरू हो रहे हैं—

1. वाटर एटीएम और ‘अमृत कलश’ प्रोजेक्ट

रिसर्च बताती है कि गर्मियों में हीट स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण डिहाइड्रेशन है। Sumitra Jan Kalyan व्यस्त चौराहों, बस स्टैंडों और स्लम बस्तियों में सौर ऊर्जा से चलने वाले ‘वाटर एटीएम’ लगाने की तैयारी कर रहा है। हम कंपनियों से अपली करते हैं कि वे सार्वजनिक स्थानों पर ठंडे और शुद्ध पेयजल की मशीनें प्रायोजित कर सकती हैं, जिससे हजारों राहगीरों को राहत मिलेगी।

2. पोर्टेबल ‘कूलिंग शेल्टर’ (Cooling Hubs)

मजदूरों और रिक्शा चालकों के लिए दोपहर की धूप जानलेवा होती है। Sumitra Jan Kalyan सड़कों के किनारे पोर्टेबल, इको-फ्रेंडली कूलिंग शेड्स बनाने की योजना में है, जहां मिस्ट कूलिंग (mist cooling) पंखे लगे हों। हम कंपनियों से इस प्रोजेक्ट में साझेदारी की अपील करते हैं। कंपनियां अपने ब्रांड के नाम से इन शेल्टरों को स्थापित कर सकती हैं, जो न केवल सामाजिक सेवा है बल्कि ब्रांड की दृश्यता (visibility) भी बढ़ाता है।

3. मोबाइल हेल्थ वैन – ‘हीट वेव रिलीफ यूनिट’

गर्मियों में लू (Heat Stroke) के मामले 40% तक बढ़ जाते हैं। हम बिहार के अलग—अलग शहरों में ओआरएस (ORS), ग्लूकोज और आपातकालीन दवाओं से लैस वैन चलाएंगे, जो स्लम बस्तियों और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर जाकर मजदूरों की जांच करे। फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र की कंपनियां अपनी सीएसआर निधि से इन मोबाइल यूनिट्स को संचालित कर सकती हैं।

4. सस्टेनेबल रूफटॉप कूलिंग (गरीब बस्तियों के लिए)

टिन शेड या झोपड़ियों में रहने वालों के लिए कमरा ‘भट्ठी’ बन जाता है। ‘सोलर रिफ्लेक्टिव पेंट’ या ‘ग्रीन रूफ’ तकनीक के जरिए झुग्गियों की छतों का तापमान 5-7 डिग्री तक कम करना। सीमेंट और पेंट कंपनियां इस तकनीक को प्रायोजित कर हजारों परिवारों को असहनीय गर्मी से बचा सकती हैं।

5. पशु-पक्षी और पर्यावरण संरक्षण

गर्मी सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बेजुबानों पर भी भारी पड़ती है। शहर के पार्कों और सड़कों के किनारे हजारों की संख्या में पानी के पात्र (Bird Baths) रखना और वृक्षारोपण।

कंपनियों से अपील: क्यों दें इस गर्मी में सीएसआर फंड?

भारत सरकार के कंपनी अधिनियम, 2013 (अनुसूची VII) के तहत आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता दी गई है। भीषण गर्मी अब एक प्राकृतिक आपदा का रूप ले चुकी है।
आपकी कंपनी का एक छोटा सा निवेश किसी मजदूर को लू से मरने से बचा सकता है। यह निवेश केवल परोपकार नहीं, बल्कि एक स्वस्थ और उत्पादक समाज की नींव है। जब आप एक ‘वाटर एटीएम’ या ‘कूलिंग सेंटर’ स्पॉन्सर करते हैं, तो आप सीधे तौर पर ‘क्लाइमेट एक्शन’ (SDG 13) और ‘गुड हेल्थ’ (SDG 3) जैसे वैश्विक लक्ष्यों में योगदान देते हैं।”

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