कुपोषण मिटाने की मुहिम में सुमित्रा जन कल्याण के साथ कदम बढ़ाइए, CSR के जरिए कंपनियां बनें कुपोषण-मुक्त भारत की साझेदार
CSR with Sumitra Jan Kalyan Sewa Sansthan: भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में कुपोषण-मुक्त समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। हाल ही में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कॉरपोरेट जगत से अपील की कि वे अपने सीएसआर व्यय को कुपोषण से निपटने की दिशा में केंद्रित करें, क्योंकि यह केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि देश और कंपनियों—दोनों के भविष्य में निवेश है।
“यह दान नहीं है, यह आपके भविष्य के मुनाफे में निवेश है” – पीयूष गोयल
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कॉरपोरेट जगत से स्पष्ट शब्दों में कहा कि कुपोषण से निपटने पर किया गया सीएसआर खर्च किसी प्रकार का दान नहीं, बल्कि भारत और कंपनियों—दोनों के भविष्य में निवेश है। उन्होंने जोर दिया कि यदि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है, तो देश को कुपोषण-मुक्त बनाना अनिवार्य है।
गोयल के अनुसार, कुपोषण की वास्तविक रोकथाम गर्भावस्था और शैशवावस्था में ही संभव है। इसी चरण में किया गया हस्तक्षेप बच्चे के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास की दिशा तय करता है। यही बच्चा कल का कुशल कर्मचारी, जिम्मेदार नागरिक और सक्षम उपभोक्ता बनता है।
कुपोषण: सामाजिक चुनौती नहीं, आर्थिक अवसर
भारत में कुपोषण केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं है, बल्कि यह उत्पादकता, श्रम क्षमता और बाजार विस्तार से सीधा जुड़ा हुआ विषय है।
कुपोषित बच्चा भविष्य में कमजोर कार्यबल बनता है
कमजोर कार्यबल कंपनियों की विकास क्षमता को सीमित करता है
जबकि स्वस्थ बच्चा नए बाजार, नई मांग और स्थायी विकास की नींव रखता है
इसीलिए गोयल ने कंपनियों से आग्रह किया कि वे 2% सीएसआर को कानूनी बोझ नहीं, बल्कि रणनीतिक अवसर के रूप में देखें।
सुमित्रा जन कल्याण सेवा संस्थान के साथ कदम बढ़ाइए
सुमित्रा जन कल्याण सेवा संस्थान कुपोषण के मूल कारणों पर सीधे काम करने वाला एक जमीनी संगठन है। पिछले 20 सालों से यह एनजीओ बिहार और झारखंड के विभिन्न ग्रामीण और कुपोषित एरिया में गरीब बच्चों और महिलाओं को कुपोषण से निकालने के लिए लगातार काम कर रहा है। अगर कॉरपोरेट जगत CSR के जरिये मदद दें तो इस काम को और व्यापक रूप से किया जा सकता है। SJKSS इस नेक काम में सभी कंपनियों से मदद की अपील करता है।
अभी हम क्या कर रहे हैं:
आंगनवाड़ी एवं सरकारी स्कूलों में पोषण सहयोग
बच्चों के लिए दूध एवं पोषक आहार की उपलब्धता
माताओं के लिए पोषण जागरूकता और निरंतर निगरानी
शहरों से बाहर, दूरदराज क्षेत्रों में सीधा क्रियान्वयन
कॉरपोरेट्स क्यों जुड़ें?
श्री गोयल के शब्दों में—
“कॉरपोरेट कंपनियां खुद की मदद कर रही हैं, नए बाजार, नया श्रम और भविष्य के नए उपभोक्ता तैयार कर रही हैं।”
सुमित्रा जन कल्याण सेवा संस्थान के साथ साझेदारी कर कॉरपोरेट संस्थान:
अपने सीएसआर निवेश का स्पष्ट और सही प्रभाव देख सकते हैं
दीर्घकालिक सामाजिक परिवर्तन का हिस्सा बन सकते हैं
और एक स्वस्थ, सक्षम भारत के निर्माण में वास्तविक योगदान दे सकते हैं
यह केवल सहयोग नहीं, साझा भविष्य है
कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में कॉरपोरेट भागीदारी आज की आवश्यकता है।
यह सहयोग नहीं, सह-निर्माण है।
यह दान नहीं, दूरदर्शी निवेश है।
आइए, सुमित्रा जन कल्याण सेवा संस्थान के साथ मिलकर उस भारत की नींव रखें, जहां हर बच्चा स्वस्थ हो और हर कंपनी का भविष्य मजबूत।
सुमित्रा जन कल्याण सेवा संस्थान के साथ साझेदारी कर आप:
हजारों बच्चों को स्वस्थ भविष्य दे सकते हैं
माताओं को सशक्त बना सकते हैं
और एक मजबूत, सक्षम भारत के निर्माण में भागीदार बन सकते हैं
क्यों कुपोषण पर सीएसआर निवेश आवश्यक है?
कुपोषण की जड़ पर प्रहार होगा जिससे स्वस्थ एवं सक्षम समाज का निर्माण होगा।
कुपोषित बच्चा भविष्य का कमजोर श्रमिक और सीमित उपभोक्ता बनता है
स्वस्थ बच्चा = मजबूत कार्यबल + नया बाजार
पोषण पर खर्च किया गया हर रुपया लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न देगा।